इतनी सच्चाई है इन आँखों में
खोटे सिक्के भी खरे हो जाएँ
तू कभी प्यार से देखे जो उधर
सूखे जंगल भी हरे हो जाएँ
बाग़ बन जाएँ...
बाग़ बन जाएँ जो वीराने हैं
एक हल्का सा इशारा इनका
कभी दिल और कभी जाँ लूटेगा
किस तरह प्यास बुझेगी उसकी?
किस तरह उसका नशा टूटेगा?
जिसकी क़िस्मत में...
जिसकी क़िस्मत में ये पैमाने हैं
नीची नज़रों में है कितना जादू
हो गए पल में कई ख़्वाब जवाँ
कभी उठने, कभी झुकने की अदा
ले चली जाने किधर, जाने कहाँ
रास्ते प्यार के...
रास्ते प्यार के अंजाने हैं